वॉट्सएप की पर्ची पर बन जाता था चालान, ट्रकों के नंबर तक कभी वैरिफाई नहीं किए!

मिलर्स,नान और समितियों के कर्ताधर्ताओं ने धड़ल्ले से की धान में धांधली

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जबलपुर। जिला प्रशासन की जांच में उजागर हुए धान मिलिंग से जुड़े फर्जीवाड़े में चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। मिलर्स द्वारा वॉट्सएप पर नान(नागरिक आपूर्ति निगम) के अधिकारियों को पर्ची भेजी जाती थी और पर्ची पर लिखा ट्रक नंबर लिखकर चालान(आरओ)जारी कर दिया जाता था। अफसरों ने कभी ना तो ट्रक नंबर वैरिफाई किया और ना ही कभी ट्रकों में भरा माल ही देखा। भ्रष्टचार के नए चरम को छूने वाले इस प्रकरण में अंतर जिला मिलिंग प्रक्रिया के कायदों को ठेंगे पर रखकर काम किया गया। इस प्रकरण में कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा मनकेड़ी के फर्जी आरओ की शिकायत की जांच पहले ही जारी थी,लेकिन जब अजय विश्नोई ने इस मामले को उठाया तो जांच दल बनाकर तेजी से जांच की गयी।

-96 फीसदी धान का गोलमाल
जांच में पता चला कि जबलपुर से मुरैना, उज्जैन, ग्वालियर, विदिशा और मंडला भेजी गई धान का अधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। सैकड़ों ट्रकों में धान भेजने की बात कही गई थी। लेकिन ये ट्रक नेशनल हाईवे के टोल नाकों से गुजरे नहीं। 1 लाख 31 हजार क्विंटल से अधिक धान का परिवहन फर्जी नंबर वाले वाहनों से किया गया। टोल नाकों के सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, आरओ में दर्ज वाहन नंबर वाले 6 सौ 14 ट्रक टोल नाकों से गुजरने थे, लेकिन महज 15 ट्रक ही इन टोल नाकों से गुजरे। जांच से बचने के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों के जरिए धान का परिवहन किया गया। जो नंबर आरओ में दर्ज थे, जांच में वे नंबर बसों और कारों के निकले,जिनका ट्रांसपोर्टेशन से कोई संबंध ही नहीं था।

-ढाई हजार पन्नों से की रिपोर्ट
इस प्रकरण में जांच टीम ने ढाई हजार से ज्यादा पेजों का प्रतिवेदन कलेक्टर को सौंपा। जांच टीम ने आरटीओ,टोल नाकों और जीएसटी आदि विभागों से जानकारी एकत्रित की। घोटाले में शामिल कई मिलर्स ऐसे भी हैं,जिन्होंने केवल कागजों में ही धान खरीदी दिखाई। जिला प्रशासन ने आरोपियों के खिलाफ 12 थानों में केस दर्ज कराया है। इन 74 लोगों में नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक दिलीप किरार, निगम के 13 कर्मचारी, 17 राइस मिल संचालक और 44 सोसाइटी व उपार्जन केंद्र के कर्मचारी शामिल हैं।

-कोई ये न समझे कि कुछ नहीं होगा
नई तकनीक और नियमों में आ रहे बदलाव के कारण इस तरह के भ्रष्टाचार को पकड़ना बहुत मुश्किल नहीं है,लेकिन इसके लिए सख्त एक्शन की जरूरत है। सरकारी स्तर पर धान एवं गेहूं खरीदी की पॉलिसी में भी परिवर्तन होना चाहिए। डिस्ट्रिक्ट मैनेजर(डीएम) स्तर के अधिकारी को पूरा जिम्मा सौंपना कहीं न कहीं ठीक नहीं है। इसके ऊपर कई स्तरों पर मॉनीटङ्क्षरग की जरूरत है,जिससे गड़बड़ियां न की जा सकें।
दीपक कुमार सक्सेना, कलेक्टर

-एक दर्जन से ज्यादा गिरफ्तार,अब खुलेंगे खरीदारों के नाम
इधर, पुलिस ने देर शाम एफआईआर होने के बाद एक दर्जन से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। ज्यादातर फरार हो गये हैं,जिनके लिए टीमें गठित की गयी हैं। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि गुरुवार की रात से शुक्रवार की सुबह तक करीब एक दर्जन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। आरोपियों के घर में दबिश दी गयी,लेकिन वे पहले ही फरार हो चुके थे। जानकारों के अनुसार, आरोपियों से ये जानकारी मिल सकेगी कि जब धान दूसरे जिलों में नहीं भेजी गयी कि जबलपुर में किसे बेंची गयी। इन नामों के खुलासा होने के बाद कार्रवाई की दूसरी कड़ी शुरु होगी। बताया गया है कि इतने बड़े पैमाने में बंदरबांट करने वाले रसूखदार ही होंगे।

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