सोशल मीडिया पर बिकने लगे बोर्ड एग्जाम के पेपर!

कलेक्टर बोले, संदिग्धों की सूचना तत्काल दें

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सोशल मीडिया पर बिकने लगे बोर्ड एग्जाम के पेपर!
पांच सौ से ढाई हजा के पैकेज का ऑफर,पैरेंट्स बच्चों को समझाएं,ठगों के भरोसे साल बर्बाद न करें,
कलेक्टर बोले, संदिग्धों की सूचना तत्काल दें

जबलपुर। जैसे-जैसे बोर्ड एग्जाम की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र बेेंचने वाले जालसाज भी एक्टिव हो गये हैं। जिला प्रशासन की ओर से इनसे निपटने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है,लेकिन पैरेन्ट्स को भी सावधानी बरतनी होगी। बीते सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं,जिनके पैरेंट्स और स्टूडेंट्स ठगे गये हैं। कई
मर्तबा पेपर वायरल होने की अफवाह भी उड़ाई गयी।
-कितनी सजा, कितना जुर्माना
मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल(माशिमं)की 10वीं व 12वीं परीक्षा 25 फरवरी से आयोजित की जाएगी। इस बार प्रश्नपत्र वायरल करने वालों के खिलाफ स्कूल शिक्षा विभाग सख्त कदम उठाएगा। सायबर क्राइम की टीम के साथ मिलकर प्रश्न-पत्रों को वायरल करने वाले शिक्षकों, कर्मचारियों या संबंधितों पर नजर रखी जाएगी। प्रश्नपत्र वायरल करने वालों पर परीक्षा अधिनियम 1937 के तहत तीन साल की जेल व पांच हजार रुपये जुर्माना लगेगा।
-एक्टिव हो गये हैं ग्रुप
सोशल मीडिया पर अभी 20 से अधिक ग्रुप प्रश्न-पत्रों को वायरल करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। इनपर नकेल कसने के लिए मंडल की ओर से पांच सदस्यीय गठित समिति भी नजर रखेगी। हर जिले में जिला स्तरीय कमेटी गठित की गई है। साथ ही मंडल मुख्यालय स्तर पर भी ऑनलाइन निगरानी होगी। समिति में जिला कलेक्टर, सीईओ, संभागीय संयुक्त संचालक, संभागीय अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी निगरानी करेंगे। वहीं मंडल मुख्यालय में भी हर जिले के नोडल अधिकारी बैठाए जाएंगे, जो परीक्षा संचालन पर ऑनलाइन निगरानी करेंगे।
-सायबर सेल को किया गया सतर्क
मंडल के अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा शुरू होने के पहले ही अभी से सोशल मीडिया(टेलीग्राम आदि) पर 20 से अधिक ग्रुप बनने की जानकारी मिली है। इन ग्रुपों में नार्मल, गोल्ड व पैलेटिनम पैकेज दिए जा रहे है। इसमें प्रश्र-पत्रों की कीमत 500 से 2500 रुपये की रुपये रखी है। वास्तविक प्रश्नपत्रों की गारंटी भी दी जा रही है। इसे लेकर माशिमं ने राज्य सायबर सेल को पत्र लिख चुका है। अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आने के साथ ही सोशल मीडिया पर विद्यार्थियों से धोखाधड़ी करने वाले कई ग्रुप सक्रिय हो जाते हैं। कई ग्रुप पैसों की मांग करते हैं और विद्यार्थियों को फर्जी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराते हैं। इस वजह से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को आर्थिक हानि होने के साथ मानसिक तकलीफ का भी सामना करना पड़ता है, जबकि प्रश्नपत्र भी नकली होते हैं।
-वर्जन
अफवाहों पर ध्यान न दें
अभिभावकों को सोशल मीडिया पर पेपर वायरल होने की अफवाहों से बचना होगा ताकि वे अपने बच्चों को भी इनसे सेफ कर सकें। ठगों द्वारा पेपर बेंचे जाने की सूचना तत्काल जिला प्रशासन, पुलिस या जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दें। हर स्तर पर जागरूक होकर आगे बढ़ना होगा।

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