बालाघाट में मारे गये नक्सलियों से मिले हथियारों का जबलपुर से कनेक्शन!

इंसास और एसएलआर के सीरियल नंबर से खुलेगा राज

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बालाघाट। इसी हफ्ते बालाघाट में मारे गये चार नक्सलियों से बरामद हथियारों का कनेक्शन जबलपुर से जुड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। खुफिया एजेंसियों ने केंद्र सरकार को भेजी रिपोर्ट में इन हथियारों के सोर्स के रूप में जबलपुर का जिक्र किया है। गहरी संभावना है कि जल्दी इस बारे में खुलासा हो और इन हथियारों और नक्सलियों के बीच की कड़ी उजागर हो जाए। मुठभेड़ में मारी गई महिला नक्सलियों के पास से मिली इंसास राइफल और एसएलआर के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
इन हथियारों पर दर्ज सीरियल नंबर से पता चलेगा कि ये कहां से बने हैं। नक्सलियों ने छीने हैं या चुराए हैं या फिर तीसरी संभावना है। उल्लेखनीय है कि ये दोनों तरह हथियार पुलिस और सेना को ही मिलते हैं। एहतियातन पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां गोपनीयता बरत रही हैं।
-विस्थापितों के मकान बने नए ठिकाने

रिपोर्ट के अनुसार, नक्सली कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के विस्थापित वन ग्रामों को अपना ठिकाना बना रहे हैं। वे यहां विस्थापितों के सूने मकानों रहते हैं और मौका मिलते ही यहां से मंडला जिले से होते हुए नक्सली अपना दायरा अमरकंटक तक फैलाने की की कोशिश कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के बाद मंडला और जबलपुर के जंगली इलाकों से लगे गांवों में सुरक्षा तो बढ़ाई ही गयी है साथ ही नक्सली गतिविधियों के मददगार चेहरों को भी खोजा जा रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिसंबर, 2024 में भी कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में नक्सलियों के साथ अलग-अलग दिन दो मुठभेड़ हो चुकी हैं। इससे साफ है कि नक्सली इस क्षेत्र को सुरक्षित समझकर ठिकाना बना रहे हैं। मध्य प्रदेश में मुठभेड़ के बाद छत्तीसगढ़ की सीमा पर भी दोनों राज्य अलर्ट पर हैं। ताकि नक्सली छत्तीसगढ़ की तरफ न भाग सकें। छत्तीसगढ़ पुलिस ने नक्सलियों के आने-जाने वाले कॉरिडोर में चौकसी बढ़ा दी है।

-पुरुषों से ज्यादा महिलाएं आगे

रिपोर्ट के अनुसार नक्सली संगठन में महिलाओं की संख्या पुरुषों की तुलना में अधिक हो गई है। इन इलाकों में भी नक्सली इकाईयों में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। रणनीति के तहत बड़े नक्सली हर जगह महिलाओं को ही आगे कर रहे हैं। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सक्रिय नक्सली दलों ने भर्ती का नया सिस्टम डेवलप कर लिया है। पहले युवाओं पर फोकस कर उनका ब्रेनवॉश किया जाता था, लेकिन अब बच्चों पर उनकी नजर है। नतीजतन नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिवार बेटियों की शादी कम उम्र में ही करने लगे हैं ताकि बच्चे हों और उन्हें नक्सली गतिविधियों में झौंका जा सके।

-क्या है कान्हा भोरमदेव दलम
बालाघाट में बुधवार को पुलिस मुठभेड़ में मारी गईं चारों महिला नक्सली कान्हा भोरमदेव दलम से जुड़ी थीं। नक्सलियों की यह इकाई या दलम कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के भोरमदेव के बीच के क्षेत्र में सक्रिय है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, ये संगठन अपने विस्तार के लिए सक्रिय हो गया है। हालाकि,पुलिस इन पर नजर बनाए हुये है।

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