ज्योतिष – The Prapanch https://www.theprapanch.com India's Top News Portal Sun, 19 May 2024 04:46:53 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.2 https://www.theprapanch.com/wp-content/uploads/2024/04/cropped-Screenshot_9-32x32.jpg ज्योतिष – The Prapanch https://www.theprapanch.com 32 32 पीएम मोदी ने जिस मुहूर्त में किया नामांकन दाखिल.. https://www.theprapanch.com/the-moment-in-which-pm-modi-filed-his-nomination/ https://www.theprapanch.com/the-moment-in-which-pm-modi-filed-his-nomination/#respond Sun, 19 May 2024 04:46:53 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=1116 वाराणसी लोकसभा सीट से पी.एम. नरेन्द्र मोदी ने नामांकन किया। हिन्दू पंचाग के अनुसार जिस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नामांकन दाखिल किया है। उस समय अभिजीत मुहुर्त आनंद योग के साथ पुष्प नक्षत्र भी था। इस नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा भी माना जाता है।]]>

वाराणसी लोकसभा सीट से पी.एम. नरेन्द्र मोदी ने नामांकन किया। हिन्दू पंचाग के अनुसार जिस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नामांकन दाखिल किया है। उस समय अभिजीत मुहुर्त आनंद योग के साथ पुष्प नक्षत्र भी था। इस नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा भी माना जाता है। इस समय कोई भी कार्य किया जाता है तो उस कार्य में सफलता जरूर मिलती है, नरेन्द्र दमोदर दास मोदी का जन्म अनुराधा नक्षत्र 17 सितम्बर 1950 की दोपहर 12:21 बजे वृश्चिक लग्न में हुआ नरेन्द्र मोदी जी नरेन्द्र मोदी जी की कुण्डली के अनुसार उनकी राशि वृश्चिक है वृश्चिक राशि के स्वामी ग्रह मंगल व राशि के देवता श्री हनुमान जी महाराज / प्रभु श्री राम होते है। इस राशि के लोग सत्य प्रवृत्ति के होते है वृश्चिक राशि के लोग भावुक / संवेदनशील होते है वृष राशि के साथ उसका विरोधी अकर्षण होता है वृश्चिक राशि वालों के लिए मेरी ज्योतिष गणना के अनुसार एवं ग्रह नक्षत्रों की यथा स्थिति जो दृष्टिगोचर हो रही है वर्ष 2024 इनके लिये व्यक्तिगत विकास/इनकी सफलता के लिये एक उत्कृष्ट समय होगा इनकी लिये भाग्यशाली रत्न मूंगा है वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शुभ अंक 9 है अतः 9 अंक की श्रृखंला 9, 18, 36, 45, 63 शुभ होती है अंकीय गणना के अनुसार एवं अंकों की सुभता को ध्यान में रखकर कार्य करें तो अवश्य सफलता प्राप्त होगी इस संदर्भ में लखनऊ के मशहूर मन्दिर चारों धाम के महन्त सियाराम अवस्थी ने भविष्यवाणी की है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोती तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेगे एवं इस बार भी पिछले बार से ज्यादा बहुमत से जीतेंगे।

मैं राष्ट्रीय ज्योतिष अचार्य पण्डित श्री विनोद दुबे ने भी पूर्णरूपेण श्री नरेन्द्र मोदी जी के समस्त गृह नक्षत्रों उनकी कुण्डली एवं उनकी राशि के आधार पर जो गणना की है उसका सार यह निकलता है जो मैंने प्रेस नोट में आपको बताया है। पत्रकारवार्ता में पण्डित विनोद दुबे महन्त मनीषा दास, पं. प्रशान्त कृष्ण शास्त्री, पं. कृष्ण प्रसाद शास्त्री, अचार्य श्रीकान्त चौबे, सतीश तिवारी जी, अजय अधिकार, दिनेश गिरि जी, एडवोकेट आशीष अवस्थी, हरिशंकर तिवारी जी, महन्त साध्वी सविता दीदी।

]]>
https://www.theprapanch.com/the-moment-in-which-pm-modi-filed-his-nomination/feed/ 0
धूमधाम से निकली भगवान परशुराम शोभायात्रा https://www.theprapanch.com/lord-parshuram-procession-started-with-great-pomp/ https://www.theprapanch.com/lord-parshuram-procession-started-with-great-pomp/#respond Fri, 10 May 2024 06:30:51 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=776 ब्राह्मण एकता मंच एवं परशुराम वंशक संगठन के तत्वाधान में इस बार यह शोभायात्रा मालवी चौक से शाम 5:00 बजे समस्त विप्र बंधुओं की अगवाई में प्रारंभ हुई। यह शोभा यात्रा दिन-ब-दिन जबलपुर के लिए गौरवशाली लम्हों की साक्षी बनती जा रही है।]]>

जबलपुर।भगवान परशुराम प्रकटोत्सव की पूर्व संध्या पर आयोजित की जाने वाली शोभा यात्रा की भव्यता संस्कारधानी की पहचान बन चुकी है। ब्राह्मण एकता मंच एवं परशुराम वंशक संगठन के तत्वाधान में इस बार यह शोभायात्रा मालवी चौक से शाम 5:00 बजे समस्त विप्र बंधुओं की अगवाई में प्रारंभ हुई। यह शोभा यात्रा दिन-ब-दिन जबलपुर के लिए गौरवशाली लम्हों की साक्षी बनती जा रही है। मां नर्मदा की असीम कृपा व भगवान परशुराम के आशीर्वाद से इस शोभायात्रा का प्रयास है कि जबलपुर की सुख शांति, समृद्धि व आपसी सद्भाव का संदेश संपूर्ण देश में प्रवाहित हो। ब्राह्मण समाज सदैव से इस बात का द्योतक रहा है कि हम आप सब एक माला में पिरोये गए मोतियों की तरह एक सूत्र में बंधे रहे और जब जहां जैसी परिस्थितियों आए उसका मिलजुल कर मजबूती के साथ सामना करें। और आज हमें खुशी है कि हम संस्कारधानी में इसे देख भी रहे हैं और महसूस भी कर रहे हैं।

पंडित योगेंद्र दुबे एवं श्री राम दुबे के संयोजन में आयोजित की जाने वाली शोभायात्रा में आज विधायक इंदु तिवारी विधायक लखन घनघोरिया, विधायक अभिलाष पांडे, पूर्व महापौर प्रभात साहू, श्री दिनेश यादव, श्री आशीष दुबे, समस्त पार्षद गण ———————-एवं सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विप्र संगठनों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान समस्त विप्र बंधुओं, माताओं-बहनों एवं युवा तरुणाई ने हाथ में फरसा लेकर जय जय परशुराम के उद्घोष लगाये। शोभा यात्रा के दौरान माताओं-बहनों बुजुर्ग वर एवं बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। धर्म गुरुओं की अगुवाई में आयोजित की गई आज की इस शोभा यात्रा में ब्राह्मण एकता मंच एवं परशुराम वंशज संगठन के द्वारा 20 झांकियां, बैंड, शहनाई आदि की प्रस्तुति उल्लेखनीय रही। यह शोभा यात्रा मालवीय चौक से कोतवाली के बीच में जहां-जहां से होकर गुजरी उस मार्ग पर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मंच लगाकर, पुष्प वर्षा कर, मिष्ठान वितरण कर, शीतल पेय प्रदान कर इसका स्वागत किया।

शोभा यात्रा के समापन पर ब्राह्मण एकता मंच एवं परशुराम वंशज संगठन में जबलपुर की सुख शांति, समृद्धि, और उन्नति की भगवान परशुराम से प्रार्थना की है।

]]>
https://www.theprapanch.com/lord-parshuram-procession-started-with-great-pomp/feed/ 0
व्रत में साबूदाना खाना सही या गलत? जानें क्या कहते हैं शास्त्र https://www.theprapanch.com/is-it-right-or-wrong-to-eat-sago-during-fasting-know-what-the-scriptures-say-acharya-ji-revealed/ https://www.theprapanch.com/is-it-right-or-wrong-to-eat-sago-during-fasting-know-what-the-scriptures-say-acharya-ji-revealed/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:54:36 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=296 सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्त्व होता है, हिन्दू धर्मग्रंथों में व्रत-क्रिया को संकल्प, सत्कर्म अनुष्ठान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं. सभी तरह के दुःख – दर्द दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. व्रत […]]]>

सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्त्व होता है, हिन्दू धर्मग्रंथों में व्रत-क्रिया को संकल्प, सत्कर्म अनुष्ठान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं. सभी तरह के दुःख – दर्द दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. व्रत सामान्य तौर पर दो तरीके के होते हैं जिनमें एक तो सामान्य व्रत होता है. दूसरा निर्जला व्रत होता है. सामान्य व्रत वह व्रत होता है जिसमें व्रतधारी जल, फल, दूध जैसे फलाहार का सेवन कर व्रत पूर्ण करता है, जबकि निर्जला व्रत में व्रतधारी जल, अन्य, फल समस्त वस्तुओं का त्याग कर व्रत पूर्ण करता है.

साबूदाना व्रत के लिए सही या गलत
कई बार प्रश्न यह उठता है कि क्या व्रत में साबूदाना खाना चहिए या नहीं? वैज्ञानिक आधार पर व्रत के दौरान साबूदन खाना सेहत के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है, लेकिन शास्त्रीय मत व्रत के दौरान साबूदाना खाने से मना करते हैं. इसके पीछे की मुख्य वज़ह साबूदान को बनाए जाने की प्रक्रिया है, क्योंकि सनातन धर्म में व्रत की पवित्रता महत्वपूर्ण होती है. चाहे वह पूजन के समय हो या प्रसाद बनात समय.

साबूदाना पाम सागो के तने में पाए जाने वाले टैपिओका रूट से बनता है, जिसे कई दिनों तक प्रोसेस करके हम तक पहुंचाया जाता है. ऐसे में शुद्धता संबंधी मानकों में यह उचित नहीं बैठता और धर्मगुरु इसे अशुद्ध मानते हैं, इसलिए शास्त्रीय मत होता है कि फलाहार में साबूदाना से परहेज करें.

व्रत में कैसा फलाहार लें
व्रत के दौरान आप साबूदाना और रेवड़ी दाना, जो कि शक्कर और आटे से बनता हैं, इनका सेवन नहीं करें. इसके अलावा, दूध, फल, आलू, सिंघाड़ा इत्यादि को फलाहार लेने की सलाह देते हैं. आचार्य पंकज ने बताया कि प्रातः पूजा संपन्न होने के बाद दूध या जल का सेवन करें. उसमें प्रसाद रूप में फल ले सकतें है, उसके बाद संध्या आरती के पश्चात ही फलाहार करें. दोपहर में भी शुद्ध कपड़ों के पहन कर ही जल लेना चहिए, व्रत एक प्रतिज्ञा है, जिसे पूर्ण करने के लिए कड़ाई से पालन करें. इसके अतिरिक्त तामसी भोजन से दूर रहें. उसका स्पर्श आप के व्रत को खंडित कर सकता है, इसलिए तामसी वस्तुओं से उचित दूरी बना कर रखें.

]]>
https://www.theprapanch.com/is-it-right-or-wrong-to-eat-sago-during-fasting-know-what-the-scriptures-say-acharya-ji-revealed/feed/ 0
17 बार तोड़ा और लूटा गया सोमनाथ मंदिर… फिर किसने बढ़ाई इसकी भव्यता? दर्शन करने जरूर जाए यहां https://www.theprapanch.com/somnath-temple-was-demolished-and-looted-17-times-then-who-increased-its-grandeur-must-visit-here/ https://www.theprapanch.com/somnath-temple-was-demolished-and-looted-17-times-then-who-increased-its-grandeur-must-visit-here/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:52:49 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=293 सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्त्व होता है, हिन्दू धर्मग्रंथों में व्रत-क्रिया को संकल्प, सत्कर्म अनुष्ठान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं. सभी तरह के दुःख – दर्द दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. व्रत […]]]>

सनातन धर्म में व्रत का विशेष महत्त्व होता है, हिन्दू धर्मग्रंथों में व्रत-क्रिया को संकल्प, सत्कर्म अनुष्ठान भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं. सभी तरह के दुःख – दर्द दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. व्रत सामान्य तौर पर दो तरीके के होते हैं जिनमें एक तो सामान्य व्रत होता है. दूसरा निर्जला व्रत होता है. सामान्य व्रत वह व्रत होता है जिसमें व्रतधारी जल, फल, दूध जैसे फलाहार का सेवन कर व्रत पूर्ण करता है, जबकि निर्जला व्रत में व्रतधारी जल, अन्य, फल समस्त वस्तुओं का त्याग कर व्रत पूर्ण करता है.

साबूदाना व्रत के लिए सही या गलत
कई बार प्रश्न यह उठता है कि क्या व्रत में साबूदाना खाना चहिए या नहीं? वैज्ञानिक आधार पर व्रत के दौरान साबूदन खाना सेहत के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. इससे शरीर को एनर्जी मिलती है, लेकिन शास्त्रीय मत व्रत के दौरान साबूदाना खाने से मना करते हैं. इसके पीछे की मुख्य वज़ह साबूदान को बनाए जाने की प्रक्रिया है, क्योंकि सनातन धर्म में व्रत की पवित्रता महत्वपूर्ण होती है. चाहे वह पूजन के समय हो या प्रसाद बनात समय.

साबूदाना पाम सागो के तने में पाए जाने वाले टैपिओका रूट से बनता है, जिसे कई दिनों तक प्रोसेस करके हम तक पहुंचाया जाता है. ऐसे में शुद्धता संबंधी मानकों में यह उचित नहीं बैठता और धर्मगुरु इसे अशुद्ध मानते हैं, इसलिए शास्त्रीय मत होता है कि फलाहार में साबूदाना से परहेज करें.

व्रत में कैसा फलाहार लें
लोकल 18 से बात करते हुए आचार्य पंकज सावरियां ने बताया कि व्रत के दौरान आप साबूदाना और रेवड़ी दाना, जो कि शक्कर और आटे से बनता हैं, इनका सेवन नहीं करें. इसके अलावा, दूध, फल, आलू, सिंघाड़ा इत्यादि को फलाहार लेने की सलाह देते हैं. आचार्य पंकज ने बताया कि प्रातः पूजा संपन्न होने के बाद दूध या जल का सेवन करें. उसमें प्रसाद रूप में फल ले सकतें है, उसके बाद संध्या आरती के पश्चात ही फलाहार करें. दोपहर में भी शुद्ध कपड़ों के पहन कर ही जल लेना चहिए, व्रत एक प्रतिज्ञा है, जिसे पूर्ण करने के लिए कड़ाई से पालन करें. इसके अतिरिक्त तामसी भोजन से दूर रहें. उसका स्पर्श आप के व्रत को खंडित कर सकता है, इसलिए तामसी वस्तुओं से उचित दूरी बना कर रखें.

17 बार नष्ट किया गया
सोमनाथ में दूसरा शिव मंदिर 649 ईस्वी में वल्लभी के यादव राजाओं द्वारा बनाया गया था. इसके अलावा गुर्जर प्रतिहार वंश के नागभट्ट द्वितीय, चालुक्य राजा मूलराज, राजा कुमारपाल, सौराष्ट्र के राजा महीपाल जैसे राजाओं ने इसे कई बार बनवाया. गजनवी के अलावा सिंध के गवर्नर अल-जुनैद, अलाउद्दीन खिलजी, औरंगजेब ने इसे बर्खास्त कर दिया. इतिहासकारों का कहना है कि सोमनाथ मंदिर को 17 बार नष्ट किया गया और हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया.

वर्तमान मंदिर का निर्माण किसने करवाया?
हालांकि, जो मंदिर अब खड़ा है, उसे 1947 के बाद भारत के गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने बनवाया था और 1 दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था. सरदार पटेल सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव लेकर महात्मा गांधी के पास गए थे. गांधी जी ने इस प्रस्ताव की सराहना की और जनता से धन एकत्र करने का सुझाव दिया. सरदार पटेल की मृत्यु के बाद केएम मुंशी के मार्गदर्शन में मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य पूरा किया गया. मुंशी उस समय भारत सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री थे. मंदिर का निर्माण कैलाश महामेरु प्रसाद शैली में किया गया था. मंदिर में एक गर्भगृह, एक सभा कक्ष और एक नृत्य कक्ष है. शिखर के शीर्ष पर रखे गए कलश का वजन 10 किलोग्राम है और ध्वजदंड 27 फीट ऊंचा और एक फीट की परिधि वाला है.

]]>
https://www.theprapanch.com/somnath-temple-was-demolished-and-looted-17-times-then-who-increased-its-grandeur-must-visit-here/feed/ 0
आपको घर में लगानी है तुलसी? पहले जान लें इसके 4 महत्वपूर्ण नियम, दिशा का भी रखें विशेष ध्यान https://www.theprapanch.com/do-you-want-to-plant-basil-in-your-home-first-know-its-4-important-rules-pay-special-attention-to-the-direction-also/ https://www.theprapanch.com/do-you-want-to-plant-basil-in-your-home-first-know-its-4-important-rules-pay-special-attention-to-the-direction-also/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:51:45 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=290 माना जाता है कि जिस घर में रोज तुलसी की पूजा होती है. उस घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. यदि तुलसी का पौधा घर में सही दिशा में रखा हो तो यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर पॉजिटिव ऊर्जा को बढ़ाता है. घर में उचित दिशा में लगा तुलसी का पौधा […]]]>

माना जाता है कि जिस घर में रोज तुलसी की पूजा होती है. उस घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. यदि तुलसी का पौधा घर में सही दिशा में रखा हो तो यह घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर पॉजिटिव ऊर्जा को बढ़ाता है. घर में उचित दिशा में लगा तुलसी का पौधा सौभाग्य का प्रतीक होने के साथ घर में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है, इसलिए इसे सही दिशा में लगाना चाहिए. यदि इसे गलत दिशा में रख दिया जाए तो इसके दुष्परिणाम मिलने लगते है. घर में तुलसी का पौधा लगाने के क्या नियम हैं?
1. तुलसी के पौधे के पास रहे पर्याप्त रोशनी
तुलसी के पौधे को ऐसे स्थान में रखना चाहिए, जहां अंधेरा ना हो. पौधे में सूर्य की रोशनी पड़ती हो तो ऐसे स्थान को चुनना चाहिए. यदि तुलसी का पौधा ऐसी जगह पर रखा हो, जहां प्रकाश कम आता हो तो यह अशुभ होता है और घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है.

2. गमले में ही लगाएं तुलसी का पौधा
घरों में तुलसी का पौधा लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि इस पौधे को सीधे जमीन में ना लगाएं. कई लोग तुलसी के पौधे को सीधे जमीन पर लगा देते हैं. ऐसा कतई न करें. घरों में तुलसी का पौधा हमेशा गमले में लगाएं. पौधे को गमले या चबूतरा बनाकर लगाना शुभ माना जाता है.

3. इन चीजों को तुलसी से रखें दूर
तुलसी को पवित्र पौधा माना जाता है. इसके लिए ध्यान रखें कि इसके आस-पास हमेशा सफाई हो और कोई भी गंदी वस्तु जैसे-जूते चप्पल, झाड़ू और गंदे कपड़े भूलकर भी न रखें. इसके साथ ही तुलसी को हमेशा स्नान करने के बाद ही छुएं.

4. उत्तर-पूर्व दिशा में रखें तुलसी
तुलसी की हर दिन पूजा होती है. इसके लिए ध्यान रखें कि तुलसी के पौधे को हमेशा सही दिशा में रखें. वास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी के पौधे को रखने का श्रेष्ठ स्थान उत्तर-पूर्व को माना गया है. इसके साथ ही तुलसी को कभी भी दक्षिण दिशा में भूलकर भी नहीं रखना चाहिए. यह दिशा यमराज की मानी जाती है और इस दिशा में तुलसी का पौधा रखने से नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव बढ़ता है.

]]>
https://www.theprapanch.com/do-you-want-to-plant-basil-in-your-home-first-know-its-4-important-rules-pay-special-attention-to-the-direction-also/feed/ 0
यह है काफी चमत्कारिक और रहस्यमई शिव मंदिर, आज तक कोई सही से नहीं बता पाया प्रतिमाओं की संख्या https://www.theprapanch.com/this-is-a-very-miraculous-and-mysterious-shiva-temple-till-date-no-one-has-been-able-to-tell-the-exact-number-of-idols/ https://www.theprapanch.com/this-is-a-very-miraculous-and-mysterious-shiva-temple-till-date-no-one-has-been-able-to-tell-the-exact-number-of-idols/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:50:39 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=287 बीकानेर में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जो काफी रहस्यमई और चमत्कारिक हैं. ऐसा ही एक मंदिर है जो काफी चमत्कारिक है. हम बात कर रहे हैं बीकानेर से 20 किलोमीटर दूर गाढ़वाला में शिवबाड़ी नाम से प्रसिद्ध भगवान शिव के मंदिर की. जहां रोजाना लोग दर्शन करने के लिए आते हैं. इस मंदिर की […]]]>

बीकानेर में कई ऐसे प्राचीन मंदिर है जो काफी रहस्यमई और चमत्कारिक हैं. ऐसा ही एक मंदिर है जो काफी चमत्कारिक है. हम बात कर रहे हैं बीकानेर से 20 किलोमीटर दूर गाढ़वाला में शिवबाड़ी नाम से प्रसिद्ध भगवान शिव के मंदिर की. जहां रोजाना लोग दर्शन करने के लिए आते हैं.

इस मंदिर की खासियत है कि यहां मंदिर में भगवान के अवतार की पत्थर पर कई प्रतिमाएं है. इन प्रतिमाओं को एक तरफ गिनते हैं और दूसरी तरफ से गिनते है तो प्रतिमाओं की संख्या में अंतर आता है. यह राज आजतक सुलझ नहीं पाया है.

ग्रामीण हुक्माराम ने बताया कि यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है. यहां भगवान शिव का मंदिर है. इस मंदिर में सभी प्रतिमाएं देवी देवताओं की है. यहां सभी भगवान के अवतार की प्रतिमाएं हैं. इस मंदिर में पूरी भागवत कथा में बताए गए देवी देवताओं की प्रतिमाएं है. इस मंदिर में जो भी लोग अपनी मनोकामना लेकर आते है वो भगवान शिव पूरी करते है. यहां हर साल शिवरात्रि पर मेला लगता है. जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण दर्शन करने के लिए आते है. यहां शिवलिंग के अखिपुरी महाराज की समाधि भी है.

पत्थर से बनी हैं सभी प्रतिमाएं
हुक्माराम बताते है कि यहां सभी देवी-देवसाओं की प्रतिमाएं पत्थर पर बनी हुई है. साथ ही इन प्रतिमाओं के नीचे उनका नाम भी लिखा हुआ है.

]]>
https://www.theprapanch.com/this-is-a-very-miraculous-and-mysterious-shiva-temple-till-date-no-one-has-been-able-to-tell-the-exact-number-of-idols/feed/ 0
इस मंदिर में माता के दर्शन करने आते थे बाघ, भटके हुए लोगों को दिखाते है रास्ता, जानिए अनोखी महिमा https://www.theprapanch.com/tigers-used-to-come-to-this-temple-to-visit-the-mother-goddess-they-show-the-way-to-the-lost-people-know-its-unique-glory/ https://www.theprapanch.com/tigers-used-to-come-to-this-temple-to-visit-the-mother-goddess-they-show-the-way-to-the-lost-people-know-its-unique-glory/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:49:26 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=283 शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि पर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. ऐसे ही मध्य प्रदेश के सागर शहर में भी सदियों पुराना प्रसिद्ध बाघराज मंदिर है. /हां हरसिद्धि माता तीन रूपों में विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां पर दशकों पहले तक बाघ माता के दर्शन करने के लिए आते […]]]>

शक्ति की आराधना का पर्व नवरात्रि पर देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. ऐसे ही मध्य प्रदेश के सागर शहर में भी सदियों पुराना प्रसिद्ध बाघराज मंदिर है. /हां हरसिद्धि माता तीन रूपों में विराजमान हैं. मान्यता है कि यहां पर दशकों पहले तक बाघ माता के दर्शन करने के लिए आते थे. वे माता की सेवा में रहते थे. जंगली इलाका होने की वजह से भटके हुए लोगों को रास्ता भी दिखाते है. इसलिए यह इलाका बाघराज के नाम से प्रसिद्ध हो गया. मंदिर परिसर में बाघ की एक मूर्ति भी है. जिसकी पूजा की जाती है. मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि यह शहर के 90 फीसदी परिवारों की कुलदेवी हैं.

प्रसिद्ध बाघराज मंदिर में नवरात्रि के समय पर सत चंडी महायज्ञ का आयोजन पिछले 54 सालों से किया जा रहा है. मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है. सैकड़ो की संख्या में रोजाना माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. अष्टमी और नवमी पर विशेष रूप से लोग माता को खप्पर चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं.

भक्तों की मुरादों को पूरा करती हैं बाघराज माता
तीन पीढियां से मंदिर में सेव कर रहे पुजारी पुष्पेंद्र पाठक महाराज लोकल 18 से कहा कि पहले यह मंदिर शहर के बिल्कुल बाहर था. यह पहाड़ी और जंगल वाला इलाका था. यहां पर बाघों का बसेरा रहता था धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई. शहर का विकास होता गया बाघों की संख्या घटती गई. लेकिन बाघ अपनी अतीत की निशानी यहां छोड़ गए हैं. अब माता के दर्शन करने के लिए जो भी श्रद्धालु आता है. किसी भी तरह की मनोकामना हो वह पूरी होती है.

मंदिर परिसर में एक गुफा
माता किसी को भी खाली हाथ अपने दरबार से नहीं भेजती हैं. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि पहले यहां केवल माता का चबूतरा था, धीरे-धीरे माता की एक मडिया बनी लेकिन अब मंदिर ने विशाल और भव्य रूप ले लिया है. माता मंदिर परिसर में एक गुफा भी है. जिसमें अजगर दादा रहते हैं. जिन्हें सिद्ध सन्यासी संत के रूप में पूजा जाता है. लेकिन आज तक कभी इस इलाके में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. यही माता और अजगर दादा की महिमा है.

]]>
https://www.theprapanch.com/tigers-used-to-come-to-this-temple-to-visit-the-mother-goddess-they-show-the-way-to-the-lost-people-know-its-unique-glory/feed/ 0
400 साल से इस पेड़ की पूजा करते हैं लोग, माता के दर्शन से पूरी होती है हर मनोकामना! https://www.theprapanch.com/people-have-been-worshiping-this-tree-for-400-years-every-wish-is-fulfilled-by-the-darshan-of-the-mother/ https://www.theprapanch.com/people-have-been-worshiping-this-tree-for-400-years-every-wish-is-fulfilled-by-the-darshan-of-the-mother/#respond Fri, 19 Apr 2024 10:48:29 +0000 https://www.theprapanch.com/?p=280 शक्ति की आराधना के महापर्व नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है. इस नवरात्रि पर्व में देशभर में माता के अलग-अलग रूपों की आस्था और विश्वास के साथ पूजा की जा रही है. देवी के मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं. वहीं जांजगीर चांपा के लोग भी नवरात्रि धूम धाम के साथ मना […]]]>

शक्ति की आराधना के महापर्व नवरात्रि का शुभारंभ हो चुका है. इस नवरात्रि पर्व में देशभर में माता के अलग-अलग रूपों की आस्था और विश्वास के साथ पूजा की जा रही है. देवी के मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं. वहीं जांजगीर चांपा के लोग भी नवरात्रि धूम धाम के साथ मना रहे हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही देवी मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां माता का श्रृंगार पेड़-पौधों ने किया है और इन पेड़ों की रक्षा स्वयं माता रानी करती हैं. इस कारण से ही यहां सरई (साल) के पेड़ के नाम पर माता का नाम पड़ा है. लोग मां को सरई श्रृंगार के रूप में भी जानते हैं.

छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बलौदा से लगा हुआ गांव है डोंगरी. यहां मां सरई श्रृंगारिणी का मंदिर है. यहां चारों तरफ सरई (साल) के वृक्ष के साथ अन्य कई प्रकार के विशालकाय वृक्ष हैं, जिससे माता रानी का दरबार सजा हुआ है. कहा जाता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शीतलता और शांति मिलती है. साथ ही माता श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भी पूरी करती हैं. इसलिए भी माता रानी के प्रति यहां श्रद्धालुओं का अनूठा विश्वास है. यहां चैत्र और क्वांर नवरात्रि में श्रद्धालु मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कराते हैं.

सरई का पेड़ काटकर रख दिया था
मंदिर के सेवक अनिल शुक्ला ने बताया कि सरई श्रृंगार धाम में जो सरई के वृक्ष हैं, उनके महत्व के बारे में 400 साल पहले भिलाई गांव के एक साहू समाज के व्यक्ति ने बताया था. उस व्यक्ति ने जंगल में लकड़ी काटने जाते समय सरई का पेड़ काटकर रख दिया था. दूसरे दिन उसे लकड़ी लेने जब वह गाड़ा (एक तरह की गाड़ी) लेकर पहुंचा तो उसने देखा कि पेड़ की कटी हुई लकड़ी नहीं मिल रही थी, बल्कि पेड़ फिर से जुड़ गया था.

श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है
गाड़ा लेकर पहुंचे शख्स ने फिर से कटाई का प्रयास किया, लेकिन माता ने उसे रोका और उसे समझाया कि पेड़ को छोड़ देने की जरूरत है. इसके बाद भी व्यक्ति ने लकड़ी काटना जारी रखा, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद साहू समाज के लोग वनदेवी की आराधना करने लगे और पेड़ों की कटाई से डरने लगे. इसके बाद मंदिर के गर्भगृह में अखंड ज्योति जलाई गई, जो आज भी करीब 35 साल से जल रही है. यह मंदिर छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, और ओडिशा के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है.

]]>
https://www.theprapanch.com/people-have-been-worshiping-this-tree-for-400-years-every-wish-is-fulfilled-by-the-darshan-of-the-mother/feed/ 0