युनिफॉर्म में करप्शन का धब्बा,अपनी एजेंसी से कर डाली खरीदी
भ्रष्टाचार से काली कमाई करने के लिए अधिकारी सरकारी नियमों को किस तरह ठेंगे पर रखते
युनिफॉर्म में करप्शन का धब्बा,अपनी एजेंसी से कर डाली खरीदी
श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्य पर कमीशनखोरी का आरोप, बीते सालों में भी उठे थे सवाल पर कार्रवाई नहीं हुई, प्रेशर में बच्चों ने साध रखी है चुप्पी
जबलपुर। भ्रष्टाचार से काली कमाई करने के लिए अधिकारी सरकारी नियमों को किस तरह ठेंगे पर रखते हैं इसका ताजा उदाहरण है श्रमोदय विद्यालय,जबलपुर। विद्यालय के प्राचार्य ने बच्चों की यूनिफॉर्म खरीदी की जिम्मेदारी उस एजेंसी को नहीं दी,जिसे सरकार द्वारा तय किया गया था,बल्कि गणवेश खरीदी का काम अपनी एजेंसी को दी। प्राचार्य की इस हठधर्मिता पर भोपाल से एक्शन लिया गया है। प्राचार्य साल-दर-साल इसी तरह से भ्रष्टाचार करते हुये कमीशन के रूप में लाखों रुपये हजम कर रहे हैं। आर्थिक अनियमितता का ऐसा ही मामला वर्ष 2022-23 में भी सामने आया था।
-ये हैं खरीदी के नियम
लोक शिक्षण संचालनालय ने आदेश जारी किया था कि प्रदेश के समस्त श्रमोदय आवासीय विद्यालयों के बच्चों की गणवेश व्यवस्था कर्मकार मंडल द्वारा की जाएगी। विद्यालय के प्राचार्य छात्र संख्या के आधार पर राशि की मांग करेंगे और कर्मकार मंडल द्वारा राशि बच्चों के खातों में प्रेषित की जाएगी। आदेश के मुताबिक, किसी भी स्थिति में प्राचार्य या स्कूल के स्तर पर यूनिफॉर्म की खरीदी नहीं की जा सकेगी और बच्चे स्वयं ही बाजार से खरीदेंगे।
-करप्शन के लिए तोड़ा नियम
मप्र भवन एवं अन्य संनिर्माण ने श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्य पर शिकंजा कस दिया है। प्राचार्य पर आरोप है कि उन्होंने विद्यार्थियों से उनके गणवेश की राशि विद्यायल के खाते में ट्रांसफर कराई और उस एजेंसी से गणवेश नहीं खरीदी,जिसे कर्मकार मंडल द्वारा तय किया गया था। कायदे से वीकेयर मेडिप्लास्ट प्रायवेट लिमिटेड से खरीदी होनी थी,लेकिन प्राचार्य ने अन्य एजेंसी को काम दिया। बीते साल करप्शन की शिकायतों पर प्राचार्य से जवाब-तलब भी किया गया था,लेकिन इससे आगे कुछ हुआ नहीं और प्राचार्य इस बार भी वैसा ही कर रहे हैं।
-एक स्टूडेंट पर 12 हजार खर्च
नियमानुसार,एक विद्यार्थी की गणवेश पर करीब 12 हजार रुपये खर्च किये गये हैं। इनमें दो जोड़ी यूनिफॉर्म, एक जोड़ी ट्रैकसूट, टी-शर्ट,ब्लैजर,बेल्ट एवं बैग आदि शामिल है। करप्शन को रोकने के लिए तय किया गया था कि बच्चों के खाते में राशि भेजी जाएगी ताकि बच्चे खुद खरीदी कर सकें,लेकिन श्रमोदय विद्यालय के प्राचार्य ने ऐसा होने नहीं दिया।