जबलपुर। पुलिस के जिन आला अफसरों को ये खुशफहमी है कि उनके नीचे का अमला कानून का पालन करते हुये काम कर रहा है, उन्हें इस वक्त बरेला थाना क्षेत्र के तहत आने वाले गांवों में जाकर देखना चाहिए। आजकल इन गांवों में सुबह से ही सटोरियों के गुर्गे पहुंच जाते हैं और बेधड़क होकर दिन भर सट्टा-पट्टी लिखते हैं। बरेला थाने के स्टाफ ने बकायदा एडवांस राशि देकर चार से पांच सटोरियों को परमिशन दी है और इन सटोरियों के आदमी पूरे इलाके के गांवों में सट्टा खिला रह हैं। बरेला थाने से चंद किलोमीटर की दूरी पर सटोरिये अपने काम को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस कुछ नहीं करती।
-शर्त है कोई और न खिलाये
सटोरियों ने परमिशन लेते वक्त पुलिस के सामने शर्त रखी है कि वे हर हफ्ते तय रकम थाने आकर देंगे,लेकिन इलाके में कोई और सट्टा न खिलाए। इस शर्त को पुलिस ने मान लिया और सटोरियों ने खुद अपने ही गुर्गों को गांव बांट दिए हैं ताकि अगर कोई और खिलाए तो वे उसे पुलिस से
पकड़वा सके। कई गांवों में इन परमिशन प्राप्त सटोरियों ने गैर परमिशन प्राप्त सटोरियों को पकड़वाया भी है। ये गुर्गे ऐसे गांवों को ठिकाना बनाए हुये हैं,जहां से अन्य गांव भी सीधे जुड़े हुये हैं। बरेला थाना क्षेत्र के पड़वार, देवरी, धनपुरी, उमरिया और ऐसे ही दर्जन भर से ज्यादा गांव हैं,जहां सटोरियों के आदमी सट्टे का खेल खिला रहे हैं।
-परमिशन मिल गयी,अब क्या डर
सट्टा खिलाने वाले सटोरिये से पूछा गया कि आखिर वो इतनी दिलेरी से कैसे सट्टा खिला रहा है। उसने जवाब में कहा कि उसने बकायदा एडवांस देकर परमिशन ली है। उसने ये भी बताया कि बरेला पुलिस ने चार से पांच सटोरियों को अनुमति दी है,लेकिन अभी तक गांव नहीं बांटे हैं। जल्दी ही गांव भी बांट दिए जाएंगे तब ज्यादा आसानी होगी। इनमें से अधिकांश बरेला के ही हैं और ये सभी इसी तरह के धंधे करते आए हैं। मजेदार है कि इनके खिलाफ बरेला थाने में ही कई मामले दर्ज हैं।
-अब पुलिस की भी सुनिए
बरेला थाने में पदस्थ एक कर्मचारी ने स्वीकार किया कि सटोरियों को सट्टा खिलाने की परमिशन दी गयी है। पहले ये परमिशन गांव के हिसाब से दी जाती थी,लेकिन इस बार कुछ सटोरियों को ही पूरे इलाके का ठेका दे दिया गया है। गांव में अलग-अलग परमिशन देने पर ज्यादा परेशानी होती थी और कई बार पुलिस के हिस्से की रकम भी फंस जाती थी। दूसरे शब्दों में कहें तो सिस्टम को सेंट्रलाइज किया गया है ताकि ज्यादा हो-हल्ला न मचे और काम तेजी से आगे बढ़े। इस कर्मचारी ये भी कहा कि कुछ एक शिकायतें भी प्राप्त हुई हैं,लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
-गांव वालों की चुप्पी पर भी सवाल
सटोरियों और पुलिस का ये गठबंधन गांवों में तेजी से पैर पसार रहा है और गांवों के जिम्मेदार लोग भी बेशर्मी भरी चुप्पी साधे हुये हैं। उनकी नजरों के सामने ही सटोरिये खेल खिला रहे हैं और ग्रामीण इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।सबसे बड़ी भूमिका ग्राम पंचायत को निभानी चाहिए,लेकिन इसके कर्ताधर्ताओं को अपनी जिम्मेदारी का होश नहीं है। कुछ लोगों ने जरूर आवाज उठाई,लेकिन पर्याप्त समर्थन न मिल पाने के कारण वे भी चुप हो गये।