शिकारियों के निशाने पर टाइगर…अलर्ट
मप्र में पारधी गिरोह की मौजूदगी के इनपुट, सरकार ने जारी किया अलर्ट,
शिकारियों के निशाने पर टाइगर…अलर्ट
मप्र में पारधी गिरोह की मौजूदगी के इनपुट, सरकार ने जारी किया अलर्ट,
पेंच,बांधवगढ़ में बढ़ाई गयी चौकसी
पुष्पेंद्र द्विवेदी
भोपाल। मध्य प्रदेश के बाघों की सुरक्षा पर बढ़ते खतरे को देखते हुये सरकार की चिंता बढ़ रही है। टाइगर स्ट्राइक फोर्स एवं वन्यजीव भोपाल द्वारा सभी टाइगर रिजर्व में अलर्ट जारी किया है। खबर है कि पारधी गिरोह बाघ के शिकार के लिए तेजी से सक्रिय है और ये गिरोह मप्र के अलावा महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, असम, मेघालय व तमिलनाडु में भी सक्रिय है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पकड़े गये कुख्यात शिकारी अजित बबरिया की गैंग के दूसरे मेंबर अभी एक्टिव हैं। डिंडौरी में पकड़े गये विस्फोटक के पकड़े जाने के बाद आशंका ज्यादा बढ़ गयी है।
-चीन में है सबसे ज्यादा डिमांड
मरे हुये बाघों की सबसे ज्यादा डिमांड चीन में है। चीन में बाघ की खाल पहनकर डांस करने के लिए लोग पागल हैं। बाघ की हड्डियों का दवाओं में प्रयोग किया जाता है और हड्डियों का सूप बनाकर पीना भी काफी प्रचलन में है। शिकारियों को बाघ के बदले मोटी रकम दी जाती है इसलिए भारत में शिकारियों के बड़े गिरोह एक्टिव हैं। बाघ नेपाल से बंग्लादेश होते हुये सीधे चीन पहुंच रहे हैं।
-पेंच और बांधवगढ़ में बढ़ी गश्त
अलर्ट के बाद पेंच और बांधवगढ़ में गश्त बढ़ा दी गयी है। बांधवगढ़ के डिप्टी डायरेक्टर पीके वर्मा ने बताया कि अलर्ट जारी होने के बाद चौकसी बढ़ा दी गयी है। टाइगर रिजर्व के कोर व बफर जोन में डॉग स्क्वॉड को तैनात किया गया है। इधर, पेंच टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर रजनीश सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र की तरफ की सीमाओं को सील कर दिया गया है।
रेंज में संदिग्ध व्यक्तियों पर भी नजर रखी गयी है। मुखबिर तंत्र भी मुस्तैद हो गया है।
-वेश बदलकर आते हैं शिकारी
मप्र शिकारियों का गढ़ रहा है। पारधी और बहेलियों का ये गिरोह सागर,दमोह,पन्ना,कटनी और उमरिया जिले में डेरा डालकर रहता है। देखने के लिए ये जड़ी-बूटी बेंचते हैं,लेकिन असल में ये शिकार करने की साजिश पर काम कर रहे होते हैं। महाराष्ट्र और तेलंगाना में दबोचे गये पारधी समुदाय के शिकारियों ने कबूल किया था कि उनका गिरोह वेश बदलकर यहां-वहां रहता है और मौका मिलते ही वार कर देता है।
-ऐसा है शिकारियों को रोडमैप
मप्र में मुख्यरूप से तीन राज्यों के शिकार सक्रिय हैं। जिनमें छत्तीसगढ़,महाराष्ट और राजस्थान। चूंकि ये राज्य मप्र के सीमावर्ती इलाके हैं इसलिए शिकारियों का भागना आसान होता है। ये गिरोह कान्हा, पेंच, पन्ना, बांधवगढ़ और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील टाइगर रिजर्व का चयन करते है और इन्हीं टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र और टेरोटोरियल फॉरेस्ट मेें बाघों की रैकी करते हैं। शिकारी बंगाल और झारखंड तक पहुंच जाते हैं और कुछ समय के लिए गायब हो जाते हैं।